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हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना की घेराबंदी; ईरान की जवाबी कार्रवाई की तैयारी से युद्ध के मुहाने पर पश्चिम एशिया


दुबई/वाशिंगटन: पश्चिम एशिया (Middle East) में तनाव एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ताजा खबरों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में 'ब्लॉकैड' यानी घेराबंदी शुरू कर दी है। अमेरिका के इस कड़े कदम के जवाब में ईरान ने भी अपनी मिसाइल यूनिट्स को हाई अलर्ट पर रखते हुए जवाबी हमले (Counterattack) की पूरी तैयारी कर ली है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति और सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है।

अमेरिका की 'घेराबंदी' के पीछे का कारण

अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान की ओर से बढ़ते खतरों और अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई है।

  • रणनीतिक दबाव: अमेरिका इस घेराबंदी के जरिए ईरान पर कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बनाना चाहता है, ताकि वह अपनी सैन्य गतिविधियों को सीमित करे।

  • नेवल डिप्लॉयमेंट: खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी विमानवाहक पोत (Aircraft Carriers) और विध्वंसक जहाजों की तैनाती बढ़ा दी गई है, जो हॉर्मुज से गुजरने वाले हर संदिग्ध जहाज की निगरानी कर रहे हैं।

ईरान की चेतावनी: "जवाब होगा विनाशकारी"

ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडरों ने अमेरिका की इस घेराबंदी को 'युद्ध की घोषणा' करार दिया है।

  1. मिसाइल फोर्स अलर्ट: ईरान ने अपनी 'फतेह' और 'खलीफा' जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों को लॉन्च पैड पर तैनात कर दिया है।

  2. ड्रोन स्क्वाड्रन: ईरानी नौसेना ने भी अपने आत्मघाती ड्रोनों और छोटी लड़ाकू नौकाओं को जलडमरूमध्य के आसपास सक्रिय कर दिया है, जो किसी भी समय अमेरिकी बेड़े को निशाना बना सकते हैं।

  3. हॉर्मुज को बंद करने की धमकी: ईरान पहले भी कई बार चेतावनी दे चुका है कि यदि उसकी सुरक्षा को खतरा हुआ, तो वह दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग को पूरी तरह बंद कर देगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह रास्ता है जहाँ से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है।

  • कच्चे तेल की कीमतें: इस घेराबंदी की खबर मात्र से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल आने लगा है।

  • सप्लाई चेन: यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो भारत सहित कई एशियाई और यूरोपीय देशों में ईंधन का संकट पैदा हो सकता है।

दुनिया की नजरें और कूटनीतिक प्रयास

संयुक्त राष्ट्र (UN) और यूरोपीय देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छोटी सी भी गलतफहमी हुई, तो यह स्थिति एक भीषण क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकती है, जिसमें इजरायल और अन्य खाड़ी देश भी शामिल हो सकते हैं।

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