उत्तर प्रदेश के मेरठ में बिजली उपभोक्ताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में महिलाओं ने प्रीपेड स्मार्ट मीटरों के खिलाफ बिजलीघर पहुंचकर जमकर हंगामा किया। महिलाओं का आरोप है कि जब से नए स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, उनके बिजली के बिल पहले की तुलना में दोगुने से भी अधिक हो गए हैं, जिससे मध्यम और गरीब परिवारों के लिए घर चलाना मुश्किल हो गया है।
बिल 800 से सीधा 3000 के पार
प्रदर्शनकारी महिलाओं (ऊषा, प्रीति, दीप्ति, संगीता और अनीता) ने बताया कि पहले उनका मासिक बिजली बिल 800 से 1000 रुपये के बीच आता था। लेकिन स्मार्ट मीटर लगते ही यह आंकड़ा अचानक बढ़कर 2500 से 3000 रुपये प्रति माह तक पहुंच गया है। महिलाओं का कहना है कि वे मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालती हैं, ऐसे में इतना भारी-भरकम बिल भरना उनके लिए नामुमकिन है।
बिना सूचना बिजली कटने से परेशानी
स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए महिलाओं ने कहा कि प्रीपेड सिस्टम के कारण जैसे ही बैलेंस खत्म होता है, बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली काट दी जाती है। इससे घर के रोजमर्रा के कामों में भारी दिक्कतें आ रही हैं। उनका यह भी कहना है कि दिहाड़ी मजदूरों के लिए हर समय मीटर में एडवांस पैसा रखना संभव नहीं है।
अधिकारियों की अनुपस्थिति और तनाव
हंगामे के दौरान स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब बिजलीघर के कर्मचारियों ने गेट अंदर से बंद कर लिया। सूचना मिलने पर डायल 112 पुलिस मौके पर पहुंची और उनकी मौजूदगी में गेट खुलवाया गया। हालांकि, मौके पर कोई वरिष्ठ जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था, जिससे महिलाओं में और अधिक नाराजगी देखी गई।
क्या कहते हैं अधिकारी?
इस मामले पर एसडीओ प्रकाश सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रीपेड मीटर में बैलेंस खत्म होने या माइनस में जाने पर सप्लाई अपने आप बंद हो जाती है। महिलाओं के प्रदर्शन को संज्ञान में लेते हुए उन्होंने आश्वासन दिया है कि उपभोक्ताओं की समस्याओं की जांच की जाएगी और उचित समाधान निकाला जाएगा।
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