मेरठ: मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) के अंतर्गत विभिन्न कॉलोनियों और कार्यालयों में तैनात आउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारियों के सामने अचानक आजीविका और रोजगार का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ठेका प्रणाली और प्रशासनिक नीतियों में बदलाव के चलते सैकड़ों कर्मचारियों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर कर्मचारी यूनियन बेहद आक्रोशित है और उन्होंने अपनी भविष्य की रणनीति तय करने के लिए एक आपात और महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।
अचानक छंटनी और रोस्टर प्रणाली से कर्मचारी परेशान
सफाई कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, एमडीए प्रशासन द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना या ठोस कारण के पुराने और अनुभवी सफाई कर्मियों को काम से हटाने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा, नई रोस्टर प्रणाली और मानदेय (सैलरी) में कटौती की आशंकाओं ने कर्मचारियों की चिंता को और बढ़ा दिया है। लंबे समय से बेहद कम वेतन पर शहर की सफाई व्यवस्था संभालने वाले इन संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों का कहना है कि यदि उनका रोजगार छीना गया, तो उनके परिवारों के सामने भुखमरी की नौबत आ जाएगी।
यूनियन की बैठक में बनी आंदोलन की रणनीति
रोजगार की रक्षा और शोषण के खिलाफ सफाई कर्मचारी यूनियन के बैनर तले आयोजित इस बैठक में भारी संख्या में एमडीए के सफाई कर्मी एकजुट हुए। बैठक में कर्मचारी नेताओं ने प्रशासनिक अधिकारियों के इस अड़ियल और तानाशाही रवैये की कड़े शब्दों में निंदा की। यूनियन ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया है कि यदि एमडीए प्रशासन ने सफाई कर्मचारियों के रोजगार को सुरक्षित रखने का लिखित आश्वासन नहीं दिया, तो वे पूरे शहर में कार्यबहिष्कार करने के लिए मजबूर होंगे।
प्रशासन को अल्टीमेटम: बातचीत से हल निकालने की मांग
कर्मचारी प्रतिनिधियों ने साफ किया है कि वे शहर की सफाई व्यवस्था को बाधित नहीं करना चाहते, लेकिन अपने पेट पर लात मारकर वे शांत भी नहीं बैठेंगे। यूनियन की ओर से मेरठ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष (Vice Chairman) और सचिव को एक मांग पत्र सौंपने का निर्णय लिया गया है। कर्मचारियों ने प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि यदि तीन दिनों के भीतर उनके रोजगार संकट का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो एमडीए मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन और उग्र आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।
सफाई व्यवस्था ठप होने की आशंका
मेरठ की कई वीआईपी कॉलोनियों और मुख्य मार्गों की सफाई का जिम्मा एमडीए के इन्हीं कर्मचारियों पर निर्भर है। ऐसे में यदि यह विवाद समय रहते नहीं सुलझा और कर्मचारी हड़ताल पर गए, तो मानसून की दस्तक से पहले शहर की सफाई और कचरा प्रबंधन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। अब देखना यह होगा कि एमडीए प्रशासन इस संवेदनशील मामले पर क्या बीच का रास्ता निकालता है।
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