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`यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बीच रूस ने पहली बार माना तेल उत्पादन में गिरावट

 

अंतरराष्ट्रीय: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध अब ऊर्जा युद्ध में तब्दील हो चुका है। लगातार हो रहे यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण रूस ने पहली बार आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया है कि उसके कच्चे तेल (Crude Oil) के उत्पादन और राजस्व (Revenue) में गिरावट दर्ज की गई है। रूस की तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाकर किए जा रहे ये हवाई हमले सीधे तौर पर मॉस्को की आर्थिक रीढ़ पर चोट कर रहे हैं। इस वैश्विक घटनाक्रम का असर कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक, भारत पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।

यूक्रेनी ड्रोनों ने उड़ाई नींद, रूस का राजस्व गिरा 

अंतरराष्ट्रीय बाजार और रूसी आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में उछाल के चलते रूस के सालाना राजस्व में करीब 32.4% की बढ़ोतरी जरूर देखी गई, लेकिन अगर इसकी तुलना अप्रैल महीने से की जाए, तो रूस के तेल राजस्व में 20.7% की भारी मासिक गिरावट दर्ज की गई है। यूक्रेन ने अपनी युद्ध रणनीति बदलते हुए रूस के भीतर 1,400 से 1,600 किलोमीटर अंदर घुसकर 'किरीश' (Kirishi) जैसी कई बड़ी तेल रिफाइनरियों और गैस प्रसंस्करण संयंत्रों (Gas Processing Plants) पर आत्मघाती ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों से रिफाइनरियों को गंभीर बुनियादी नुकसान पहुंचा है और कई हफ्तों तक उत्पादन ठप रहा है।

मांग में तेजी और घरेलू स्तर पर ईंधन का संकट

लगातार हो रहे इन हमलों और घरेलू स्तर पर तेल की बढ़ती मांग के कारण रूस के कई हिस्सों में गैसोलीन और ईंधन की कमी महसूस की जा रही है। रूसी वाहन चालकों को पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ रहा है। हालांकि, रूसी रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश ड्रोनों को मार गिराया है, लेकिन तेल उत्पादन और शोधन (Refining) क्षमता पर पड़ा असर अब छिपाए नहीं छिप रहा है।

भारत पर क्या होगा इसका असर? (Impact on India) 

रूस के तेल संकट का भारत पर दोतरफा असर देखने को मिल रहा है, जो रणनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण है:

  • सस्ते रूसी कच्चे तेल (Urals Crude) की आपूर्ति पर असर: यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से भारत, रूस से भारी डिस्काउंट पर कच्चा तेल खरीद रहा है। रूस में उत्पादन और रिफाइनिंग घटने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ेगा।

  • भारतीय रिफाइनरियों के लिए बड़ा अवसर (Refining Margin): दूसरी तरफ, रूसी रिफाइनरियों के ठप होने का भारतीय तेल कंपनियों (जैसे रिलायंस और अन्य सरकारी रिफाइनरियों) को सीधा फायदा मिल रहा है। भारतीय रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और रूस से कच्चा तेल खरीदकर उसे प्रोसेस (साफ) कर यूरोप और अन्य देशों को डीजल व ईंधन निर्यात कर रही हैं। यूरोपीय प्रतिबंधों के बीच भारत एक प्रमुख 'स्विंग सप्लायर' (ईंधन आपूर्तिकर्ता) बनकर उभरा है, जिससे देश के निर्यात मुनाफे (Refining Margins) में भारी उछाल आया है।

निष्कर्ष: भू-राजनीतिक जोखिम और बढ़ती चुनौतियां 

भले ही भारतीय कंपनियां इस संकट के बीच रणनीतिक लाभ उठा रही हैं, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध का यह नया भयानक दौर वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ा रहा है। यदि यूक्रेन के यह ड्रोन हमले इसी तरह जारी रहे और रूस के मुख्य तेल डिपो पूरी तरह तबाह होते हैं, तो आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है, जो भारत जैसे विकासशील देश के लिए मुद्रास्फीति (महंगाई) की नई चुनौती खड़ी कर सकता है।

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