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भारी हंगामे के बीच 1017 करोड़ का बजट पास, पार्षदों और अधिकारियों में तीखी नोकझोंक

मेरठ: मेरठ नगर निगम की बजट बैठक में मंगलवार को जबरदस्त ड्रामा और हंगामा देखने को मिला। भारी शोर-शराबे और पक्ष-विपक्ष के बीच नगर निगम ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1017 करोड़ रुपये का बजट सर्वसम्मति से पारित कर दिया। बैठक के दौरान विकास कार्यों और सफाई व्यवस्था को लेकर पार्षदों ने अधिकारियों को जमकर घेरा।

हंगामे की भेंट चढ़ी शुरुआत

टाउन हॉल में आयोजित इस बैठक की शुरुआत होते ही विपक्षी पार्षदों ने शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था और ड्रेनेज की समस्या को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी।

  • अधिकारियों पर आरोप: पार्षदों का आरोप था कि मानसून से पहले नालों की सफाई के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की गई है, जिसका खामियाजा जनता जलभराव के रूप में भुगत रही है।

  • विकास की उपेक्षा: कई पार्षदों ने अपने वार्डों में विकास कार्यों की अनदेखी और भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए सदन के बीचों-बीच आकर विरोध प्रदर्शन किया।

बजट की मुख्य विशेषताएं (1017 करोड़ का आवंटन)

तमाम विरोधों के बावजूद महापौर और नगर आयुक्त ने बजट प्रस्ताव पेश किया, जिसे बाद में पास कर दिया गया। बजट में इन क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया है:

  1. सड़क और बुनियादी ढांचा: शहर की मुख्य सड़कों और आंतरिक गलियों की मरम्मत के लिए बड़ा हिस्सा आवंटित किया गया है।

  2. सफाई और कूड़ा निस्तारण: 'स्वच्छ भारत अभियान' के तहत शहर को कूड़ा मुक्त बनाने और डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन को बेहतर करने के लिए नई मशीनों की खरीद का प्रस्ताव है।

  3. स्ट्रीट लाइट और सौंदर्यीकरण: चौराहों के सौंदर्यीकरण और अंधेरे वाले इलाकों में नई एलईडी (LED) लाइटें लगाने के लिए बजट प्रावधान किया गया है।

  4. स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट: मेरठ को स्मार्ट सिटी के मानकों पर खरा उतारने के लिए आईटी (IT) आधारित सुविधाओं पर खर्च किया जाएगा।

महापौर और पार्षदों में तकरार

बैठक के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब महापौर और एक वरिष्ठ पार्षद के बीच व्यक्तिगत टिप्पणी को लेकर तीखी बहस हो गई। अन्य पार्षदों के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। नगर आयुक्त ने आश्वासन दिया कि बजट में आवंटित धनराशि का पारदर्शी तरीके से उपयोग किया जाएगा और सभी वार्डों में समान रूप से विकास कार्य कराए जाएंगे।

करों में कोई बढ़ोतरी नहीं

मेरठ वासियों के लिए राहत की बात यह रही कि इस बजट में हाउस टैक्स या अन्य स्थानीय करों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी का प्रस्ताव नहीं किया गया है। निगम का ध्यान पुराने बकाया करों की वसूली और आय के नए स्रोत विकसित करने पर रहेगा।

बैठक के अंत में ध्वनि मत से बजट को मंजूरी दे दी गई, जिसके बाद महापौर ने शहर के विकास के लिए सभी पार्षदों से सहयोग की अपील की।

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