नई दिल्ली/दुबई: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की घेराबंदी के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा कूटनीतिक और सैन्य बचाव अभियान 'ऑपरेशन वापसी' (Operation Wapsi) शुरू कर दिया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उस क्षेत्र में फंसे 15 भारतीय वाणिज्यिक जहाजों (Commercial Ships) और उन पर सवार सैकड़ों भारतीय क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकालना है।
क्या है 'ऑपरेशन वापसी'?
खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति को देखते हुए भारत ने अपने समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया है:
नौसेना की सुरक्षा: भारतीय नौसेना के युद्धपोत (Warships) इन 15 जहाजों को 'एस्कॉर्ट' यानी सुरक्षा घेरा प्रदान करेंगे, ताकि वे सुरक्षित रूप से अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में पहुंच सकें।
निरंतर निगरानी: सैटेलाइट और टोही विमानों के जरिए इन जहाजों की लोकेशन पर पल-पल की नज़र रखी जा रही है।
राजनयिक माध्यम: भारत सरकार ओमान, ईरान और यूएई के साथ निरंतर संपर्क में है ताकि जहाजों के सुरक्षित गलियारे (Safe Passage) को सुनिश्चित किया जा सके।
फंसे हुए जहाजों की स्थिति
हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के कारण ये जहाज पिछले कुछ घंटों से वहीं ठहरे हुए थे।
क्रू मेंबर्स की सुरक्षा: जहाजों पर सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित बताए जा रहे हैं। अधिकारियों ने उनके परिवारों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है।
आवश्यक सामग्री: इन जहाजों में तेल, गैस और अन्य महत्वपूर्ण व्यापारिक सामान लदा हुआ है, जो भारतीय बंदरगाहों की ओर आ रहा है।
कम्युनिकेशन: विदेश मंत्रालय ने जहाजों के कप्तानों को निर्देश दिया है कि वे केवल सुरक्षित और एनक्रिप्टेड चैनलों के जरिए ही संपर्क करें।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह क्षेत्र?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों (कच्चे तेल और एलपीजी) का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से मंगवाता है।
आपूर्ति श्रृंखला: यदि ये जहाज वहां लंबे समय तक फंसे रहते हैं, तो देश में ईंधन की कीमतों और सप्लाई पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
नौसैनिक शक्ति का प्रदर्शन: 'ऑपरेशन वापसी' दुनिया को यह संदेश भी देता है कि भारत अपने नागरिकों और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए किसी भी संकटपूर्ण क्षेत्र में प्रभावी कदम उठाने में सक्षम है।
विदेश मंत्रालय का बयान
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "हमारी प्राथमिकता हमारे नागरिकों और जहाजों की सुरक्षा है। हम क्षेत्र में शांति की उम्मीद करते हैं, लेकिन किसी भी स्थिति से निपटने के लिए हमारी नौसेना और कूटनीतिक टीमें पूरी तरह तैयार हैं।"
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