नोएडा/गाजियाबाद: दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक फैसला लिया है। आगामी 1 अक्टूबर से नोएडा, गाजियाबाद सहित यूपी के सभी एनसीआर जनपदों में बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC - Pollution Under Control Certificate) वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन (पेट्रोल, डीजल या सीएनजी) नहीं दिया जाएगा। यानी अगर आपके वाहन का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट एक्सपायर हो चुका है, तो आपको तेल नहीं मिलेगा।
प्रदूषण के खिलाफ 'नो पीयूसीसी, नो फ्यूल' नीति तैयार
उत्तर प्रदेश के परिवहन विभाग और पर्यावरण मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में इस नई नीति को अंतिम रूप दिया गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य सर्दियों के मौसम में दिल्ली-एनसीआर में होने वाले गंभीर वायु प्रदूषण और स्मॉग की स्थिति को पहले ही नियंत्रित करना है। अधिकारियों के मुताबिक, वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत है। इस सख्ती के बाद वाहन चालक समय पर अपने वाहनों की प्रदूषण जांच कराने के लिए बाध्य होंगे।
पेट्रोल पंपों पर होगी ऑनलाइन चेकिंग की व्यवस्था
इस नियम को जमीनी स्तर पर कड़ाई से लागू करने के लिए परिवहन विभाग एक विशेष सॉफ्टवेयर और मोबाइल ऐप तैयार कर रहा है। 1 अक्टूबर से जब भी कोई वाहन चालक नोएडा या गाजियाबाद के किसी पेट्रोल पंप पर ईंधन भरवाने जाएगा, तो वहां मौजूद कर्मियों द्वारा वाहन के नंबर को परिवहन विभाग के 'वाहन' (VAHAN) पोर्टल पर चेक किया जाएगा। यदि वाहन का PUCC वैध (Valid) पाया जाता है, तभी नोजल से तेल की सप्लाई शुरू होगी। बिना चेकिंग या अमान्य सर्टिफिकेट पर तेल देने वाले पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ भी सख्त दंडात्मक कार्रवाई और जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है।
वाहन चालकों को दिया गया पर्याप्त समय
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने साफ किया है कि जनता को परेशान करना सरकार का मकसद नहीं है, इसलिए इस नियम को लागू करने के लिए लगभग 4 महीने का समय दिया गया है। जून से लेकर सितंबर तक वाहन चालक अपने नजदीकी अधिकृत केंद्रों पर जाकर अपने वाहनों की फिटनेस और प्रदूषण स्तर की जांच करवाकर वैध प्रमाणपत्र हासिल कर सकते हैं। इसके साथ ही, एनसीआर क्षेत्र में नए प्रदूषण जांच केंद्र खोलने की प्रक्रिया भी तेज की जाएगी ताकि पंपों या केंद्रों पर लंबी कतारें न लगें।
निष्कर्ष: पर्यावरण और जनता की सेहत के लिए जरूरी कदम
दिल्ली-एनसीआर में हर साल अक्टूबर और नवंबर के महीनों में हवा की गुणवत्ता (AQI) 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच जाती है, जिससे सांस और दिल के मरीजों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की इस 'नो पीयूसीसी, नो फ्यूल' नीति को पर्यावरणविदों ने एक सराहनीय और क्रांतिकारी कदम बताया है। हालांकि, इसे पूरी तरह सफल बनाने के लिए पेट्रोल पंप एसोसिएशनों का सहयोग और आम जनता में जागरूकता होना बेहद जरूरी है।
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